October 29, 2020

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THE HINDI FACTS

GAYATRI MANTRA MEANING

“हम सुधरेंगे , युग सुधरेगा , हम बदलेंगे , युग बदलेगा “-{Gayatri Mantra} [Param Pujya Ptd. Shri Ram Sharma Acharya Ji ]

जैसे ही हम गायत्री मंत्र {Gayatri Mantra}  के बारे में सुनते है या चर्चा करते है , तो हमे सबसे पहले गायत्री परिवार ओर गायत्री परिवार की स्थापना करने वाले पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य का नाम सबसे पहले ध्यान आता है । आज हम इस लेख में पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य , गायत्री परिवार और गायत्री मंत्र के फायदे के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे ।

 

पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य –

 

PTD. SHRI RAM SHARMA ACHARYA

 

अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना करने वाले महामानव पंडित श्रीराम आचार्य का जन्म अश्विनी कृष्ण त्रयोदशी , विक्रम संवत 1967 यानी 20 सितंबर 1911 को उत्तरप्रदेश के आगरा जनपद के आँवलखेड़ा गांव में हुआ था ।

इनके पिताजी का नाम श्री पंडित रूपकिशोर शर्मा था । इनका बाल्यकाल व किशोर अवस्था ग्रामीण परिवेश में गुजरा था । इनका जन्म एक जमीदार घराने में हुआ था जहां सुख सुविधाओं की कोई कमी नही थी फिर भी इनका मन सिर्फ दींन दुखियों की सेवा करने व उसके करुणा प्रेम करने में लगता था ।

कहते है कि पूत के पग पालने में ही दिखते है कुछ ऐसा ही इनके साथ था साधना के प्रति झुकाव तो इनका बचपन से ही दिखाई देता था जब ये अपने दोस्तो को सुसंस्कारित शिक्षा और आत्मज्ञान की शिक्षा दिया करते थे । एक बार इसी छटपटाहट में हिमालय की तरफ भाग निकले और पकड़े जाने पर उन्होंने कहा कि हिमालय ही मेरा घर है ।

तब तक कोई भी नही जानता था कि ये बालक जो कह रहा है वह एक दम सत्य होने वाला है कुछ दिनों के बाद ये बालक सब कुछ छोड़कर हिमालय में ही अपना घर बना लेगा ।

एक ब्राह्मण परिवार में जन्म लेने के बाद भी इनमें छुआ छूट की कोई भावना नही थी । ये सभी के साथ एक समान व्यवहार करते थे। एक बार जब इनके गांव में एक अछूत महिला को कुष्ठ रोग हो गया तो ये उसी के घर जाकर उसकी सेवा सुश्रुवा करते थे ।

इनके लिए इन्होंने अपने घरवालों के विरोध भी सहना पड़ा लेकिन इन्होंने अपना सेवा व्रत नही छोड़ा । वे चाहते थे कि जन मानस अपने पैरों पर खड़ा हो स्वावलम्बी बने ।

इसके लिए छोटे छोटे पमलेट अपने हाथों से लिखकर बंटाते थे । इसके लिए इन्होंने अपने ही गांव में नारी शक्ति के लिए और बेरोजगार युवाओं के लिए एक बुतनाघर का निर्माण करवाया और उसमें हाथ से कपड़ा कैसे बना जाता है ये सिखाया जाता था ।

पन्द्रह वर्ष की अल्पायु में पंडित मदनमोहन मालवीय ने उन्हें गायत्री मंत्र की दीक्षा दी और यही से इनके जीवन मे गुरुसत्ता का आगमन हुआ । इसके बाद इन्हें अदृश्य सूक्ष्म रूप में इनके पिछले जन्मों का विभिन्न क्रियाकलापो का अद्भुत दर्शन हुए जिससे इन्हें पता चला कि ये हिमालय से आये है और इन्हें अनेक दुर्गम दुष्कर कार्य को पूरा करते हुए समाज को एक नई दिशा देने का कार्य पूरा करना है ।

चार बार कुछ हफ़्तों से लेकर एक साल तक कि अवधि तक हिमालय आकर रहने , कठोर साधना करने का अभयास किया । इसके बाद इन्होंने गायत्री मंत्र की महिमा को जन जन के मानस तक पहुचने के लिए गायत्री परिवार की स्थापना की ।

 

इन्होंने निम्न पुस्तके भी लिखि है। –

अध्यात्म एवं संस्कृति
गायत्री और यज्ञ
विचार क्रांति
व्यक्ति निर्माण
परिवार निर्माण
समाज निर्माण
युग निर्माण
वैज्ञानिक अध्यात्मवाद
बाल निर्माण
वेद पुराण एवम् दर्शन
प्रेरणाप्रद कथा-गाथाएँ
स्वास्थ्य और आयुर्वेद

आर्श वाङ्मय (समग्र साहित्य)

भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्व
समस्त विश्व को भारत के अजस्र अनुदान
गायत्री महाविद्या
यज्ञ का ज्ञान-विज्ञान
युग परिवर्तन कब और कैसे
स्वयं में देवत्व का जागरण
समग्र स्वास्थ्य
यज्ञ एक समग्र उपचार प्रक्रिया
ईश्वर कौन है? कहाँ है? कैसा है?
निरोग जीवन के महत्वपूर्ण सूत्र
जीवेम शरदः शतम्
विवाहोन्माद : समस्या और समाधान

क्रांतिधर्मी साहित्य

शिक्षा ही नहीं विद्या भी
भाव संवेदनाओं की गंगोत्री
संजीवनी विद्या का विस्तार
आद्य शक्ति गायत्री की समर्थ साधना
जीवन साधना के स्वर्णिम सूत्र
नवयुग का मत्स्यावतार
इक्कीसवीं सदी का गंगावतरण
महिला जागृति अभियान
इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य-भाग १
इक्कीसवीं सदी बनाम उज्ज्वल भविष्य-भाग २
युग की माँग प्रतिभा परिष्कार-भाग १
युग की माँग प्रतिभा परिष्कार-भाग २
सतयुग की वापसी
परिवर्तन के महान् क्षण
महाकाल का प्रतिभाओं को आमंत्रण
प्रज्ञावतार की विस्तार प्रक्रिया
नवसृजन के निमित्त महाकाल की तैयारी
समस्याएँ आज की समाधान कल के
मन: स्थिति बदले तो परिस्थिति बदले
स्रष्टा का परम प्रसाद-प्रखर प्रज्ञा
जीवन देवता की साधना-आराधना
समयदान ही युग धर्म
युग की माँग प्रतिभा परिष्कार

 

GAYATRI PARIWAR

 

 

गायत्री परिवार -तथा Gayatri Mantra Meaning

 

 

गायत्री परिवार की स्थापना वेदमूर्ति तपोनिष्ठ युगऋषि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने की थी । अखिल विश्व गायत्री परिवार जीवन जीने की कला , संस्कृति के आदर्श सिद्धांतो को परिवार में लागू करके एक आदर्श परिवार कैसे बनाया जा सकता है , यह सिखाने का कार्य करता है । गायत्री परिवार का मानना है कज अगर परिवार संस्कारो और समृद्ध होंगे तो गांव समृद्ध होंगे और जब गांव समृद्ध होगे तो राष्ट्र स्वतः ही संस्कारित और समृद्ध बन जायेगा ।
गायत्री परिवार की स्थापना व्यक्ति को सनातन वैदिक धर्म के सिद्धांतों के आधार पर जीवन जीने की कला सिखाने के उद्देश्य के साथ 1950 में स्थापना की गई थी ।

यह एक सामाजिक आंदोलन था जिसके कई विश्व प्रशिद्ध नारे रहे है जैसे – ” हम बदलेंगे युग बदलेगा “ “मनुष्य एक भटका हुआ देवता है “ । इस संस्था ने विचार क्रांति अभियान , प्रज्ञा अभियान , आदि चलाये जिनका उद्देश्य समाजिक वैचारिक परिवर्तन लाना था । इस परिवार का धेय्य वाक्य है –

“हम सुधरेंगे , युग सुधरेगा , हम बदलेंगे , युग बदलेगा “ इसी धेय्य वाक्य को साकार करने के लिए आज भी गायत्री परिवार विभिन्न अभियानो का नेतृत्व करते हुए समाज मे एक बदलाव का आगाज कर रहा है ।

 

गायत्री मंत्र का अर्थ -{Gayatri Mantra Meaning} 

 

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।

 

 

 

Gayatri Mantra Meaning

 

सृष्टिकर्ता प्रकाशमान परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते है । परमात्मा का वह तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की और चलने के लिए प्रेरित करे ।
गायत्री मंत्र यजुर्वेद और ऋग्वेद की दो ऋचाओ से मिलकर बना है । इसमे सवितृ देव की उपासना की गई है इसलिए इसे सावित्री मंत्र भी कहते है । ऐसा माना जाता है कि इस मंत्र के उच्चारण और उपासना से ईश्वर का प्रत्यक्ष अनुभव होता है। ऐसा भी माना जाता है कि इस अद्भुत मंत्र के दृष्टा ऋषि विश्वामित्र थे ।

गायत्री मंत्र के 10 फायदे –Gayatri Mantra Meaning and  Benefits } 

 

गायत्री मंत्र का उच्चारण और उपासना शारीरिक , मानसिक और आध्यत्मिक रूप से बहुत महत्व रखती है । इस मंत्र के उच्चारण से कई मानसिक पीड़ाओं का निदान होता है । साथ ही साथ इस मंत्र की सही प्रकार से उपासना करने से आध्यात्मिक उन्नति भी होती है । गायत्री मंत्र से होने होने वाले लाभ जानकर आप हैरत में पढ़ जाएंगे । ऐसे ही कुछ 10 अदभुत लाभ जो गायत्री मंत्र के उच्चारण और उपासना से होते है निम्न है –

 

1. ध्यान करने व सीखने की क्षमता बढ़ती है –

 

हम सब जानते है कि अगर किसी काम मे हमारा ध्यान नही है तो ना तो हम उसे सीख सकते है और ना ही उसे ठीक प्रकार से कर सकते है । अगर आप विद्यार्थी है तो भी आप इस बात से भली भांति परिचित है अगर आपका ध्यान केंद्रित नही है तो आप किसी भी विषय को ठीक तरह से ना तो सीख सकते है और ना ही उसे समझ सकते है ।

लेकिन गायत्री मंत्र एक ऐसा मंत्र है जिसके लगातार उच्चारण से हमारे शरीर मे ऐसे कंपन उत्पन्न होते है जिससे शरीर के तीन चक्र – 1. विशुद्धि चक्र 2. आज्ञा चक्र 3. सहस्त्रार चक्र जागृत हो जाते है । आज्ञा चक्र हमारे दिमाग की ध्यान करने की क्षमता को बढाता है । जिससे हम किसी भी कठिन से कठिन विषय मे बहुत ही आसानी से ध्यान केंद्रित कर सकते है । विशुद्धि चक्र और सहस्त्रार चक्र हमारे सीखने की क्षमता में वृद्धि करते है । जब हमारे सीखने की क्षमता और ध्यान करने की क्षमता बढ़ जाती है तो हम किसी भी विषय को आसानी से समझ सकते है और उसमें दक्षता प्राप्त कर सकते है ।

 

2. शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर स्वस्थ रखता है –

 

 

गायत्री मंत्र के उच्चारण से होने कम्पनों के कारण हमारी त्वचा के कुछ ऐसे बिंदु सक्रिय हो जाते है जिनसे हमारी रक्त वाहिनियों में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है । हम सब जानते है कि हमारे शरीर मे दिल का कार्य शरीर मे शुद्ध रक्त की आपूर्ति करना और अशुद्ध रक्त को शुद्ध करना है । जैसे ही हमारे शरीर मे शुद्ध रक्त की मात्रा कम होने लगती है तब हमारे शरीर मे अनेक प्रकार की व्यधिया उतपन्न हो जाती है।

गायत्री मंत्र के उच्चारण रक्त मे जब ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है तो हमारे शरीर मे उपस्थित विषाक्त पदार्थ हमारे शरीर से बाहर निकल जाते है , जिससे हमारा स्वस्थ्य ठीक रहता है ।

 

3. स्वशन क्षमता में वृद्धि –

 

 

आज इस कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में चारो तरफ हाहाकार मचा हुआ है ।किसी को भी इसका इलाज नजर नही आ रहा है । ये बीमारी एक स्वशन क्रिया सम्बन्धी बीमारी है । जिंसमे व्यक्ति के सांस लेने की प्रक्रिया में बाधा उतपन्न हो जाती है ।

इस बीमारी में स्वशन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है । आज की भाग दौड़ भारी जिंदगी में हम भूल गए है कि हमे हमारे फेफड़ो को भी स्वस्थ रखना है ।

जब तक आपका स्वशन तंत्र मजबूत नही होगा तब तक आप इस महामारी से अपने आप को नही बचा सकते है । गायत्री मंत्र का उच्चारण अगर प्रणायाम के साथ किया जाए तो व्यक्ति का स्वशन तंत्र मजबूत होता है ।

व्यक्ति को अंदर लेना है और इतना अंदर लेना की और सांस लेने की जगह नही बचे और मन ही मन गायत्री मंत्र का उच्चारण करना है । फिर सांस को धीरे धीरे छोड़ना है । ये प्रक्रिया लगातार अपनानी है । इस प्रक्रिया से व्यक्ति के फेफड़े फैलते है और स्वशन तंत्र दुरुस्त होता है और पूरे शरीर मे ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है ।

 

 

4. दिल को स्वस्थ रखता है –

 

प्रणायाम के साथ लगातार गायत्री मंत्र के उच्चारण की प्रक्रिया का लगातार दोहराव करने से शरीर मे ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है , जिससे ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है । लगातार गायत्री मंत्र के उच्चरण से जागृत होने वाले शरीर के विभिन्न चक्र व्यक्ति के दिल को एक दम स्वस्थ रखने का कार्य है ।

 

5. नकारात्मकता को दूर करता है –

 

जब मस्तिष्क शांत और स्थिर रहता है तो मस्तिष्क से नकरात्मकता अपने आप ही दूर हो जाती है । गायत्री मंत्र के लगातार उच्चारण करने से उसके मतिष्क स्थिर और केंद्रित होता है जिससे मस्तिष्क को शांत व सकारात्मक रखने में मदद मिलती है ।

 

6. शरीर के तांत्रिक तंत्र को स्वस्थ रखता है –

 

हम जानते है कि हमारा मस्तिष्क तंत्रिका तंत्र के माध्यम से ही शरीर के विभिन्न हिस्सों पर नियंत्रण रखता है । अगर हमारे तंत्रिका तंत्र में कोई खराबी आजाये या व काम करना बंद कर दे तो हमारे मस्तिष्क का हमारे अंगों पर कोई नियंत्रण नही रहेगा और जिसके कारण हमारे शरीर के विभिन्न अंग काम करना बन्द कर देने ।

इसीलिए हमारा शरीर स्वस्थ रहे इसके लिए तंत्रिका तंत्र को स्वस्थ रखना अतिआवश्यक है । जब आप गायत्री मंत्र का उच्चारण करते है तो जीभ , गला , मुँह और होठों पर दबाव पड़ता है । इन स्थानों पर एक साथ दवाब पड़ने से ऐसे वाइब्रेशन उतपन्न होते है जिससे मस्तिष्क नई तंत्रिका कोशिकाओं का निर्माण करने लगता है जिससे हमारा तांत्रिक तंत्र स्वस्थ रहता है और भली प्रकार से कार्य करता है ।

 

7. अस्थमा दूर करता है –Gayatri Mantra Meaning and Benefits } 

 

अस्थमा की बीमारी भी फेफड़ो से सम्बन्धित बीमारी है। इस बीमारी में फेफड़े ठीक प्रकार से विकसित नही हो पाते है जिससे व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ता है । लगातार प्रणायाम के साथ साथ गायत्री मंत्र के उच्चारण से फेफड़े मजबूत और पूर्ण विकसित होते है । लगातार प्रणायाम और गायत्री मंत्र का उच्चारण करने से धीरे धीरे अस्थमा के लक्षण खत्म हो जाते है और व्यक्ति ठीक हो जाता है ।

 

8. मन को शान्त करता है –Gayatri Mantra Meaning and Benefits } 

 

प्राणायाम के साथ साथ लागतार गायत्री मंत्र के उच्चरण से व्यक्ति शरीर मे अनेको अच्छे हार्मोन्स स्त्रावित होने लगते है । जिससे हमारा ध्यान केंद्रित होता है । केंद्रित हुए मन मस्तिष्क से धीरे धीरे सभी प्रकार की चिंता दूर हो जाती है और मन एकदम शांत हों जाता है ।

 

9. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है –Gayatri Mantra Meaning and Benefits } 

 

गायत्री मंत्र के उच्चारण से हाइपोथैलेमस क्रियाशील हो जाता है । हाइपोथेलेमस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए उत्तरदायी होता है । इसके क्रियाशील होंने के बाद व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है जिससे व्यक्ति को कोई भी बीमारी छू नही पाती है और वह स्वस्थ रहता है ।

 

10. तनाव व चिंता को दूर करता है –Gayatri Mantra Meaning and Benefits } 

 

गायत्री मंत्र के लगातार उच्चराण करने से उपरोक्त अनेक प्रकार की समस्याओं से आराम मिलता है । अनेक चक्र जागृत होते है और अनेक प्रकार के हार्मोन्स भी स्रवित होते है जिससे व्यक्ति का मन शांत रहता है। मन मस्तिष्क के शांत रहने और मन का ध्यान केंद्रित होने के कारण अनेक प्रकार की चिंताओं से मुक्ति मिलती है साथ साथ ही व्यक्ति तनाव मुक्त भी हो जाता है । जब व्यक्ति तनाव मुक्त महसूस करता है तो उसकी कार्य करने की क्षमता में भी वृद्धि होती है ।