October 26, 2020

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Flying Cake

Flying Cake-200 की नौकरी से 8.5 करोड़ के व्यवसाय तक

Flying Cake–200 की नौकरी से 8.5 करोड़ के व्यवसाय तक

ज़िंदगी मे अगर कुछ बड़ा करना है तो रिस्क लेना सीखिए । अगर आप रिस्क नही ले सकते तो आपका जीवन बेकार है , आप जीवन मे कभी सफल नही हो सकते । क्योंकि किस्मत के भरोसे बैठे लोगों को उतना ही मिलता है जितना मेहनत करने वाले छोड़ देते है ।

आज हम बात करने वाले है ऐसे ही एक व्यक्ति की जिसने अपनी मेहनत के दम पर एक पिज्जा डिलीवरी बॉय से 8.5 करोड़ रुपये के कारोबार तक का एक सफल लेकिन संघर्षपूर्ण सिर्फ तय किया है । दिल्ली के एक बेहद गरीब परिवार में सुनील वशिष्ठ का जन्म हुआ था । इन्होंने किसी प्रकार उच्च माध्यमिक स्तर तक कि पढ़ाई पूरी की लेकिन आगे नही पढ़ पाए ।

इनके पिताजी एक सामान्य यांत्रिकी मजदूर थे और पांच सदस्यों के परिवार में एक मात्र कमाने वाले शख्स भी थे । जिससे परिवार का गुजारा भी मुश्किल से हो पाता था इसलिए सुनील को कम उम्र में ही कई नौकरियां करनी पड़ी ।

1998 में इन्होंने दिल्ली में पिज़्ज़ा डिलीवर बॉय के रूप में डोमिनोज पिज्जा में नौकरी शुरू कर दी । इसी स्टोर के साथ इन्होंने काफी लंबे समय तक काम किया और बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी के रूप अपनी पहचान बना ली ।

सुनील के बहरीन प्रदर्शन से आउटलेट्स मालिक काफी खुश थे लेकिन आउटलेट्स के अन्य कर्मचारि सुनील से ईर्ष्या रखते थे इसलिए उन्होंने 2003 में ये नौकरी भी छोड़ दी । नौकरी छोड़ने के बाद सुनील ने अपने बचत के पैसों से एक भोजनालय की शुरुआत की लेकिन अधिकारियों के लगातार परेशान करने के कारण वे इसमे सफल नही हो सके ।

4 साल के काम मे इन्होंने कोई पैसा नही कमाया लेकिन बहुत सारे अनुभवों से रुवरु जरूर हो गए । इसी के साथ उन्होंने अपने क्षेत्र में एक व्यवसाय की संभावना भी तलाशने लगे । अपने शोध के बाद उन्हें अनुभव हुआ कि इस क्षेत्र में एक केक  की दुकान की शख्त आवश्यकता है । इसके बाद इन्होंने अपनी कुछ बचत और मित्र से 58000 हजार रुपये उधार लेकर फ्लाइंग केक (Flying Cake) नाम से अपना स्वयं का स्टोर शुरू किया ।

सुनील के लिए ये काम बहुत महत्वपूर्ण था क्योकि उन्होने पहले ही भोजनालय के रूप में एक असफलता का स्वाद चख लिया था । केक क़ा काम कोई बहुत सरल काम नही था । इसमे मिलने वाले कम मार्जिन में ही ग्राहक को सर्वश्रेष्ठ उत्पाद उपलब्ध करवाना भी एक लक्ष्य था । सुनील ने लगतार अपना संघर्ष जारी रखा और आगे बढ़ते रहे ।

कहते है कि भगवान ज़िंदगी मे हर किसी को सफल होने का एक मौका अवश्य देता है ये आप पर निर्भर करता है कि आप उसे किस प्रकार भुनाने में कामयाब होते है । हर बुरे दिनों के बाद अच्छे दिन दरवाजे पर आहट जरूर देते है लेकिन हर कोई इस आहट को समझ नही पाता और दरवाजा नही खोलता है

लेकिन सुनील ने ऐसा नहि कीया ओर जैसे ही मौके ने सुनील के दरवाजे पर आहट की उन्होंने इसे हाथों हाथ इसे सफलता की ऊंचाई पर पहुचा दिया। इनके स्टोर के पास में ही एचसीएल का ऑफिस था। एक दिन इसके कार्यकारी अध्यक्ष के बेटे का जन्मदिन था । उन्होंने सुनील से अपने बेटे के लिए एक केक तैयार कराया था ।

सुनील ने भी पूरी मेहनत के साथ एक शानदार केक बना कर दिया । यह केक उन्हें इतना पसंद आया कि इसके बाद उन्होंने सुनील को कारपोरेट आर्डर दिलाने शुरू कर दिए । सुनील ने भी ताजा केक (Flying Cake) की अहमियत को समझा और उन्हीने तय किया कि वे सिर्फ आर्डर से ही केक बनाएँगे ओर जितना जल्दी हो सके उसे पहुचायेंगे भी ।

इसके सुनील ने शुरुआती दिनों में दिन के 24 – 24 घण्टे काम किया फ्लाइंग केक(Flying Cake) को ऊंचाइयों तक पहुचने के लिए।

इसके साथ उन्होंने नए नए आईडिया अपनाए जैसे पन्द्रह मिनट में केक तैयार करके देना । उनका ये आईडिया काम कर गया और उनके केक की मांग बढ़ने लगी जिससे उन्हें अपने अलग अलग जगह पर स्टोर खोलने में सहायता मिली ।

आज फ्लाइंग केक ने दिल्ली , नोएडा , पुणे जैसे शहरों में 15 शाखाएं खोल रखी है और इनका सालाना कारोबार 8.5 करोड़ रुपये का है ।

 

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