October 29, 2020

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नौकरी छोड़ किया 325 करोड़ का कारोबार

नौकरी छोड़ किया 325 करोड़ का कारोबार-डिजिटूजं (Digitunes)

हमारे देश मे आज नौकरी पाने की चाहते लिए हजारों युवकों की भीड़ मिल जाएगी । वो भीड़ ऐसी की बस सरकारी नौकरी मिल जाये तो सब ठीक हो जाये , फिर कोई फर्क नही पड़ता कि वह नौकरी उसके लायक है भी या नही । बस नौकरी मिलनी चाहिए वो भी सरकारी , लेकिन अगर बात की जाए ऐसे युवा की जिसने अपनी नौकरी छोड़ दी हो ?

तो मुझे लगता है कोई ही होगा जो कहेगा कि अच्छा किया नही तो सब यही बोलेंगे की पागल था । कुछ ऐसी ही पागलपंती एक नवयुवक ने दिखाई थी अपने सपने को सच करने के लिए । आज हम बात करेंगे ऐसे युवा की जिसने अपने सपने को पूरा करने के लिए मिली हुई एक अच्छी खासी सरकारी नौकरी को छोड़ दिया ।

ये कहानी है एक ऐसे कारोबारी की जिसे अपनी ज़िंदगी मे एक समय अंग्रेजी नही आने के कारण उपहास का पात्र बनना पड़ा था , लेकिन आज उसके ग्राहक ऐसे देशों से आते है जहां सिर्फ अंग्रेजी ही बोली जाती है । आज उनके कस्टमर भारत ही नही अमेरिका , यूरोप , ऑस्ट्रेलिया , ब्रिटेन जैसे देशों से भी है । डिजिटूजं (Digitunes)

बिहार के एक छोटे से गांव से आने वाले विकास ने 2001 में दिल्ली विश्वविद्यालय के डीएवी कॉलेज से बीकॉम किया और मल्टीमीडिया में स्नातकोत्तर डिप्लोमा करने के बाद दिल्ली सरकार में एक स्थाई नौकरी करने लगे । लेकिन एक उधमी के मन मे हमेशा अपना खुद का व्यवसाय करने की उत्कंठा हमेशा ही जीवित रहती है । यहां काम करते हुए इन्होंने काफी मेहनत की और इसी के परिणामस्वरूप ये जल्द ही टीम लीडर भी बन गए । इसके अलावा ये दिल्ली सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना कैलतुंज के टीम प्रमुख भी रहे है ।

इस परियोजना में इन्होंने अपनी मेहनत का लोहा मनवाया और इसी का नतीजा था कि इनकी टीम को आईटी मंत्रालय के द्वारा सिल्वर आइकन पुरुस्कार से जवाजा गया था । पुरुस्तकृत होने के बाद भी विकास को कोई संतुष्टि नही थे वे तो खुद की एक कम्पनी खड़ी करना चाहते थे और 2008 में इन्होंने अपनी नौकरी छोड़ सी और 2009 में अपने कुछ दोस्तों के साथ साझेदारी से मल्टीमीडिया स्टार्टअप डिजिटूजं (Digitunes) की स्थापना की । शुरुआत में इन्होंने अपनी कंपनी की बढ़ाने का निर्णय किया बिना किसी प्रॉफिट के और इसे कुछ सालों तक चलाया लेकिन साथी कर्मी ये दबाव बर्दास्त नही कर पाए और इनके तीन साथियों ने 22 लाख के निवेश को वापस लेने की मांग कर दी ।

अब विकास के सामने सबसे बड़ा संकट खड़ा हो गया । विकास ने अपने सभी संसाधनों को दांव पर लगाकर 2010 में अपने दोस्तों को तीन महीने में पूर्ण वापसी का आश्वासन दिया । लेकिन कहते है कि भाग्य में उन्ही का साथ देता है जो मेहनत करता है । विकास ने अनेक क्षेत्रो में कटौती करते हुए अपने दोस्तों को तीन महीने से पहले ही उनकी लागत राशि उन्हें लौटा दी और एक बड़े वित्तीय संकट से छुटकारा पा लिया ।

लेकिन इससे उन्हें एक बड़ी सीख मिली कि वे भविष्य में कभी भी ऐसा कोई काम नही करेंगे और ऐसी स्तिथि को वापस अपने जीवन मे नही आने देंगे । इससे सीख लेते हुए विकास आगे बढ़ने लगे और 2013 में इनके पास 50 प्रतिभाशाली कर्मचारियों की एक टीम थी और और कुछ उल्लेखनीय ग्राहक भी थे । इसके बाद विकास ने कभी पीछे मुड़कर नही देखा और लगातार मेहनत करते हुए और अपने बुलंद इरादों से इन्होंने आज अपनी कम्पनी डिजिटूजं (Digitunes) को भारत की अग्रणी 2डी एनिमेशन कम्पनियों  में से एक बना दिया है।

आज इनकी टीम में 400 कर्मचारी काम करते है। विकास ने नॉर्थ इंडिया के छात्रों को मौका देने के लिए भी इसकी एक इकाई स्थापित की है। जिंसमे 120 कर्मचारी कार्यरत है। आज इनकी कम्पनी डिजिटूजं (Digitunes) में बीबीसी , निकलोडियन , डिजिटल डोमेन जैसे ग्राहक शामिल है । इनके कार्यो को आप रिक और मोटी , निंजा टर्टल , और डॉक्टर हू जैसे कार्यकर्मो में देखा जा सकता है। आज इनकी कम्पनी की मार्किट वैल्यू लगभग 325 करोड़ रुपये है

 

 

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